परिचय :
Cholesterol कम करने की दवा सहजन के फायदे ,नुकसान और उपयोग : मोरिंगा/सहजन की दो प्रजातिया पाई जाती हैं। एक प्रजाती के फूल सफेद रंग के होते हैं और दूसरी प्रजाती के फूल लाल रंग के होते हैं।
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इसकी पत्तियां आकार में छोटी होती हैं और इसका फल लम्बा और उंगलियों के जितना मोटा होता है।
जो सफ़ेद फूल वाला मोरिंगा /सहजन होता है वो स्वाद में कड़वा होता है। जबकि लाल फूलों वाला मोरिंगा /सहजन स्वाद में मीठा होता है।
आम तौर पर सफेद फूलों वाला मोरिंगा /सहजन हर जगह पाया जाता है। लेकिन लाल फूलों वाले मोरिंगा /सहजन देखने में कम ही मिलते हैं।
मोरिंगा /सहजन की एक सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि यह भारत में लगभग हर जगह आसानी से उग जाता है। इसका पेड़ छोटा या मध्य आकार का होता है।
मोरिंगा /सहजन कफ़ ,रक्तदोष और पित्त की समस्या का शमन करता है। ये प्लीहनाशक और कृमिहर होता है। मोरिंगा/सहजन का इस्तेमाल दो तरीके से किया जाता है। पहला औषधि के रूप में और दूसरा सब्जी के रूप में।

सब्जी के रूप में इसके फल का ही इस्तमाल किया जाता है। लेकिन दवा के रूप में हम इसके फल, पत्ते , छाल और फूल मतलब इसके सभी हिस्से का इस्तेमाल करते हैं।
जब इसका फल पक जाता है ,तब इसके बीज से तेल निकाल कर इसके तेल का दर्द निवारक के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
मोरिंगा/सहजन पोषण के मामले में दूध हो, या गाजर हो, या संतरा हो सभी को पीछे छोड़ देता है।
इसके अंदर हमारे अनुमान से कहीं ज्यादा पोषक तत्व पाया जाता है। इसलिए इसे हम पूर्ण हर्बल औषधि भी कहते हैं।
भारत में मोरिंगा/सहजन की पत्तियों के पाउडर को जूस के अंदर मिलाकर भी पिया जाता है, या फिर सब्जी या दाल के ऊपर इसकी पत्तियों के पाउडर को छिड़क कर भी खाया जाता है।
पोषक तत्वों से भरपूर मोरिंगा /सहजन को अपने खाने में शामिल कर समग्र पोषण को बढ़ावा देने का एक शानदार तरीका हो सकता है।[Cholesterol कम करने की दवा सहजन के फायदे ,नुकसान और उपयोग]
वानस्पतिक नाम –
मोरिंगा ओलिफेरा ( moringa oleifera)
कुल –
मोरिंगेसी ( moringaceae )
विभिन्न भाषाओं में सहजन के नाम –
- हिंदी – सहजन, सहजन, सहजना, सैजन, मुनगा
- अंग्रेजी – ड्रम स्टिक ट्री, इण्डियन हौर्स रेडिश , हौर्स रेडिश ट्री
- संस्कृत – शोभाञ्जन, शिग्रु, तीक्ष्णगन्ध, अक्षीव, मोचक, सौभाञ्जन
- उड़िया – मुनीया , सजीना
- कोंकड़ी – मेइसिंग , मोरिंग
- कन्नड़ – नुग्गे , नुग्गी
- गुजराती – सेगते , सरगवो
- तेलगु – मुनगा
- तमिल – मंरुगाई , मुंकाई
- बंगाली – सजिना
- पंजाबी – सोंहजना , सैन्जन
- मराठी – शेवगी , शेगटा
- मलयालयम – सहिजनो , सर्हिजणो
सहजन में उपस्थित पोषक तत्वों की मात्रा :
यहाँ पर जो मात्रा बताई जा रही है वह प्रति 100 ग्राम के हिसाब से इस प्रकार है –
पोषक तत्व मात्रा प्रति 100 ग्राम में
प्रोटीन 2.1 gm
वसा 0.2 gm
फाइबर 3.2 gm
कार्बोहइड्रेट 8.53 gm
आयरन 0.36 मिलीग्राम
कैल्शियम 30 मिलीग्राम
फास्फोरस 50 मिलीग्राम
पोटेशियम 461 मिलीग्राम
मैग्नीशियम 45 मिलीग्राम
ज़िंक 0.45 मिलीग्राम
कॉपर 0.084 मिलीग्राम
सोडियम 42 मिलीग्राम
सेलेनियम 0.7 म्युग्राम
मैंगनीज 0.259 मिलीग्राम
थायमिन 0.053 मिलीग्राम
विटामिन C 141 मिलीग्राम
विटामिन B6 0.12 मिलीग्राम
राइबोफ्लेविन 0.074 मिलीग्राम
विटामिन A 4 म्युग्राम
फ़ोलेट 44 म्युग्राम
ऊर्जा 37 कैलोरी
सहजन(मोरिंगा) के फायदे और उपयोग विधि :
1 . Cholesterol कम करता है सहजन
ज़्यदातर लोग यही जानते हैं कि बादाम, अलसी और जई को ही उच्च कॉलेस्ट्रॉल के लिए प्रयोग करना होता है। लेकिन ऐसा नहीं है। मोरिंगा/सहजन की पत्तियां भी उच्च Cholesterol के खिलाफ एक कारगर औषधि हैं।
हृदय रोगों के होने का प्रमुख कारण उच्च Cholesterol है और मोरिंगा/सहजन की पत्तियां खाने से उच्च Cholesterol के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है ।
गर्भ के समय गर्भवती महिलाओं को उच्च Cholesterol की समस्या ज्यादा रहती है, जिससे उनमे गर्भकाल के दौरान गर्भकालीन मधुमेह विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है ।[Cholesterol कम करने की दवा सहजन के फायदे ,नुकसान और उपयोग]
2. सूजन को कम करने में सहायक है सहजन/मोरिंगा
हम सभी जानते हैं कि सूजन में शरीर स्वाभाविक रूप से दर्द और चोट पर कैसे प्रतिक्रिया करता है।
“आइसोथियोसाइनेट्स” की उपस्थिति के कारण मोरिंगा/सहजन की पत्तियां सूजन को कम करने मे सहायक होती हैं।
सूजन कई बीमारियों जैसे गठिया, जोड़ों मे दर्द ,कैंसर आदि का मूल कारण है।
जब हमको कोई चोट लगती है या संक्रमण होता है तो शरीर में सूजन हो जाता है। मोरिंगा/सहजन की पत्तियों को खाने से सूजन कम करने में मदद मिलती है।
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3. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है सहजन
मोरिंगा/सहजन की पत्तियों में क्लोरोजेनिक एसिड ,क्वेरसेटिन नाम के एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। जिसकी वजह से इसका प्रयोग टाइप 2 मधुमेह, हृदय की समस्याओं और अल्जाइमर जैसी कई पुरानी बीमारियों के लिए किया जाता है।
कुछ शोधों मे यह भी पाया गया है कि यदि महिलाओं को तीन महीने तक नियमित रूप से 1.5 चम्मच मोरिंगा/सहजन की पत्ती का पाउडर दिया जाये तो उनके खून में एंटीऑक्सीडेंट के स्तर में संतोषजनक वृद्धि देखी जा सकती है।[Cholesterol कम करने की दवा सहजन के फायदे ,नुकसान और उपयोग]
4 . एमिनो एसिड से भरपूर होता है सहजन
मोरिंगा की पत्तियों में अमीनो एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जो प्रोटीन के निर्माण के लिए एक जरुरी तत्व है । इसमें 18 प्रकार के अमीनो एसिड पाए जाते हैं। और इनमें से प्रत्येक हमको स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
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5. मधुमेह (शुगर) में फायदेमंद है सहजन
मोरिंगा की पत्तियों मे विटामिन सी और बीटा-कैरोटीन भी भरपूर मात्रा मे पाया जाता है जो मुक्त कणों के खिलाफ काम करतें हैं।ये मुक्त कण ही हैं जो शुगर जैसी बिमारिओं के लिए जिम्मेदार होते हैं।
गर्भकाल का मधुमेह क्या है?
यह गर्भ के समय होने वाला एक प्रकार का मधुमेह है जो उन गर्भवती महिलाओं में पाया जाता है जिन्हें गर्भवती होने से पहले मधुमेह नहीं होता है । गर्भकालीन मधुमेह के लिए मोरिंगा/सहजन की पत्तियों को या फिर इसके पाउडर को खाने से निश्चित रूप से शुगर में आराम मिलता है।
6. लीवर की सुरक्षा करता है सहजन
मोरिंगा /सहजन की पत्तियों में “पॉलीफेनोल्स” की उच्च मात्रा होती है जो लीवर को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाती है और इसे कम भी करती है।जिससे लिवर ठीक से काम करता है
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7. आर्सेनिक विषाक्तता से बचाता है सहजन
दुनिया के कई हिस्सों में “आर्सेनिक” का दुष्प्रभाव एक आम समस्या है। आर्सेनिक ने विशेष रूप से चावल के द्वारा हमारे सिस्टम में अपना रास्ता बना लिया है।
इसके हमारे शरीर में लंबे समय तक रहने से कैंसर और हृदय रोग का खतरा विकसित हो सकता है। जानवरों पर किए गए शोध से पता चला है कि मोरिंगा/सहजन की पत्तियां आर्सेनिक के दुष्प्रभाव से लड़ने में मदद करती हैं।[Cholesterol कम करने की दवा सहजन के फायदे ,नुकसान और उपयोग]
8. पेट के लिए फायदेमंद है सहजन
मोरिंगा /सहजन की पत्तियों में एंटीबायोटिक और रोगाणुरोधी गुण होते हैं जो इसे पाचन विकारों के खिलाफ एक उच्च कोटि की औषधि बनाते हैं। क्योंकि इसकी पत्तियों में विटामिन बी की उच्च मात्रा होती है , इसीलिए ये पाचन में सुधार करने में मदद करती है।

9. गठिया और हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार करता है सहजन
आपको जानकर हैरानी होगी कि मोरिंगा/सहजन की पत्तियों में कैल्शियम और फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाया जाता हैं। जो स्वस्थ हड्डियों के लिए आवश्यक तत्व हैं।
इसलिए इससे गठिया को ठीक करने में मदद मिलती हैं और क्षतिग्रस्त हड्डियां भी ठीक हो सकती हैं।
मोरिंगा/सहजन “ऑस्टियोपोरोसिस ” से भी लड़ता है जिससे हड्डियों और दांतों को मजबूती मिलती है।
10. महिलाओं के स्तनों में दूध बढ़ाता है सहजन
मोरिंगा/सहजन की पत्तियों का उपयोग शिशुओं को दूध पिलाने वाली माताओं में दूध को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
क्योकि ये प्रोटीन, विटामिन्स और जरुरी पोषक तत्वों का एक समृद्ध स्रोत हैं, इसलिए मोरिंगा/सहजन की पत्तियों का सेवन माँ और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है।
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11. वजन कम करने में मदद करता है
मोरिंगा /सहजन में प्रोटीन, विटामिन्स ,फाइबर और आवश्यक पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होता हैं। इसीलिए मोरिंगा /सहजन की पत्तियों का सेवन करने से भूख कम लगती है।
जिससे शरीर की वसा बिना स्वास्थ को नुकसान पहुँचाये प्राकृतिक तरीके से कम होने लगती है । जिससे Cholesterol नियंत्रित होने लगता हैं और व्यक्ति पतला हो जाता हैं।[Cholesterol कम करने की दवा सहजन के फायदे ,नुकसान और उपयोग]
12. त्वचा और बालों के लिए अच्छा है सहजन
मोरिंगा/सहजन में लगभग 28-30 एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। जो हमारी त्वचा में निखार लाने के लिए महत्वपूर्ण होते है।
इसीलिए अगर इसकी पत्तियों के पाउडर को त्वचा पर उपयोग किया जाये तो इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा की झुर्रियों को कम करते हैं।
इसकी पत्तियों के पेस्ट को सिर पर लगाने से रूसी कम हो जाती है।
इसी वजह से मोरिंगा/सहजन की पत्तियों का पाउडर बाजार में मिलने वाले ज्यादातर सौंदर्य प्रसाधनों मिलाया जाता हैं।
13. तंत्रिका तंत्र मजबूत बनाता है सहजन
मोरिंगा /सहजन में मौजूद विटामिन E और C की मौजूदगी तंत्रिका तंत्र को कमजोर होने से बचाती है और दिमाग को मजबूत कर उसके कार्य को बेहतर बनाने में मदद करती है।
जिनको माइग्रेन या बार-बार सिरदर्द की समस्या रहती है, उन्हें प्रतिदिन मोरिंगा की पत्तियां खानी चाहिए।
क्योंकि सहजन की पत्तियां सेरोटोनिन, डोपामाइन और नॉरएड्रेनालाईन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के उत्पादन को स्थिर करती हैं।
14. सिर दर्द में मोरिंगा /सहजन का करें इस्तेमाल
सहजन/मोरिंगा की जड़ का रस और गुड़ को बराबर मात्रा में मिला लें। फिर इस मिश्रण को छानकर 1-1 बूंद नाक में डालें । सिरदर्द मे आराम मिलेगा।
सहजन/मोरिंगा के पत्ते और काली मिर्च को एक साथ पीस लें।अब इस लेप को माथे पर लगाए। इससे भी सिर का दर्द ठीक होता है।
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सहजन/मोरिंगा के पत्तों मे थोड़ा सा पानी मिलाकर इसे पीसकर पेस्ट बना लें ।अब इस पेस्ट को माथे पर लगाएं। इससे सर्दी के कारण से होने वाले सिरदर्द में आराम हो जाता है।
15. टाइफाइड में मोरिंगा /सहजन का करें इस्तेमाल
सहजन/मोरिंगा की 20 ग्राम जड़ ले लें और उसको 100 मि.ली. पानी के साथ उबाल लें। अब इसे छानकर ठंडा कर लें। रोगी को पिलाने से टॉयफॉयड ख़त्म हो जाएगा ।
सहजन/मोरिंगा की छाल को पानी के साथ घिस लें। अब इसकी एक-एक बूंद नाक में डालें। इससे टॉयफाइड में आराम मिलेगा।[Cholesterol कम करने की दवा सहजन के फायदे ,नुकसान और उपयोग]
16. आँख के रोग में मोरिंगा /सहजन का करें इस्तेमाल
सर्दी जुक़ाम के कारण अगर आँख से पानी बह रहा हो तो सहजन के पत्तों को पीसकर उसको आँखों पर बांधने से आराम मिलता है।
अगर आँखों में धुंधलेपन की शिकायत है तो मोरिंगा/सहजन के पत्ते के 50 मि.ली. रस में 2 चम्मच शहद मिलाकर आँखों में काजल की तरह लगाने से आँखों के धुंधलेपन की बीमारी में लाभ होता है। और इससे आँखों के दर्द में भी आराम मिलता है।
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17. कान से जुडी समस्या में मोरिंगा /सहजन का करें इस्तेमाल
अगर कान के दर्द से परेशान हैं तो
20 मि.ली. सहजन की जड़ का रस + एक चम्मच शहद + 50 मि.ली. सहजन का तेल
इन सबको एक साथ गरम करके छान लें और ठंडा होने दें। अब इसकी 2-2 बूंद कान में डालें। कान के दर्द में आराम मिलेगा ।
या फिर सहजन के गोंद को तिल के तेल में मिलाकर गर्म करके छान लें और ठंडा होने दें ।अब इसकी 2-2 बूंद कान में डालने से कान दर्द में लाभ मिलेगा।
18. दाँत से जुडी समस्या में मोरिंगा /सहजन का करें इस्तेमाल
अगर दांतों में दर्द या मुँह की बदबू की समस्या है तो सहजन के गोंद को पानी में घोलकर गरारा करना चाहिए। इससे इस तरह की समस्या का समाधान हो जाता है।
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19. सांस से जुडी समस्या में मोरिंगा /सहजन का करे इस्तेमाल
सांस से सम्बन्धित कोई समस्या है उसके लिए सहजन और अदरक के रस को बराबर मात्रा में मिला कर इसकी 10-15 मि.ली. की मात्रा प्रतिदिन सुबह और शाम सेवन करने से सांसों के रोग में लाभ होता है।[Cholesterol कम करने की दवा सहजन के फायदे ,नुकसान और उपयोग]
20. जठराग्नि से जुडी समस्या में मोरिंगा /सहजन का इस्तेमाल करें
बहुत से लोगो को कच्ची -पक्की डकारों की समस्या रहती है। इसकी वजह जठराग्नि का ठीक से सक्रिय न होना है।
अगर सहजन की जड़, सरसों और अदरक को बराबर बराबर मात्रा में लेकर इसको कूट पीस कर इसकी 1-1 ग्राम की गोली बना ली जाए ।
अब इसकी 2 गोली सुबह और 2 गोली शाम को ली जाए। तो जठराग्नि सक्रिय हो जाती है।
21. पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की समस्या दूर करे सहजन
टेस्टोस्टेरोन पुरुषों का बहुत ही महत्वपूर्ण सेक्स हार्मोन होता है। ये वही हार्मोन है जो पुरुषों की सेक्सुअल हेल्थ को ठीक रखने में मुख्य भूमिका निभाता है।
आज कल के परिवेश में अधिकतर पुरुषों की जिस प्रकार की जीवा शैली है उसमे इस हार्मोन का कम होना एक आम समस्या बन चुकी है।
प्राकृतिक रूप से इस हार्मोन की कमी को दूर करने में सहजन का प्रयोग बहुत लाभकारी हो सकता है।
इसके लिए सहजन की पत्तियों के पाउडर को प्रयोग करने पर टेस्टोस्टेरोन के लेवल में सुधार होता है जिससे पुरुषों की यौन इच्छा में वृद्धि होती है।
22. पुरुषों की इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या को दूर करे सहजन
सहजन की पत्तियों और बीज में विटामिन A और C भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो पुरुषों के लिंग में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है। रक्त का प्रवाह ठीक रहने पर सम्भोग के समय पुरुषों को ठीक से इरेक्शन पाने में मदद मिलती है। [Cholesterol कम करने की दवा सहजन के फायदे ,नुकसान और उपयोग]
23. पुरुषों की फर्टिलिटी को बढ़ाता है सहजन
जब पुरुषों के शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की कमी होती है तो ऐसे में उनके खून में फ्री रेडिकल्स की मात्रा बढ़ जाती है। जिसके कारण पुरुषों में स्पर्म की कमी होने लगती है।
इस समस्या से बचने के लिए पुरुषों को चिकत्सक के परामर्श से सहजन का सेवन उचित मात्रा में शुरू कर देना चाहिए।
क्योंकि सहजन में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
इस प्रकार जब पुरुष सहजन का सेवन सुरु करते है तो उनके वीर्य में स्पर्म की संख्या बढ़ने लगती है और धीरे-धीरे उनकी फर्टिलिटी बढ़ जाती है।
24. पथरी की समस्या को कम करने में सहायक है सहजन
सहजन का सेवन करने से पथरी का जोखिम कम होता है। क्योंकि सहजन के नियमित सेवन से यह किडनी में मिनरल्स को जमा होने से रोकता है जोकि पथरी का निर्माण करते हैं। क्योकि इसके प्रयोग से पेशाब का प्रवाह तेज रहता है।
25. एनीमिया (खून की कमी) को दूर करता है सहजन
हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आयरन ,फोलेट और विटामिन C बहुत जरुरी होते हैं। ये सभी सहजन में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसीलिए अगर सहजन का नियमित सेवन किया जाये तो इससे एनीमिया की शिकायत नहीं होती है।
26. कमजोर पाचनशक्ति को ठीक करे सहजन
अगर किसी की पाचनशक्ति कमजोर है तो सहजन के 10-20 मि.ली. काढ़े में 2 ग्राम सोंठ मिला लें। फिर इसे सुबह-शाम को पिएं। इससे पाचन शक्ति बढ़ती है।
27. अगर पेट में गैस बन रही हो तो प्रयोग करें सहजन
100 ग्राम सहजन की जड़ की छाल + हींग 5 ग्राम + 20 ग्राम सोंठ
इन सब में थोड़ा पानी मिलाकर एक साथ पीस लें और 1-1 ग्राम की गोलियां बना लें। अब इसकी 1-1 गोली सुबह -दोपहर -शाम खाने से पेट की गैस में लाभ मिलता है।
28. पेट में कीड़े को मारे सहजन
सहजन की फलियों की सब्जी बनाकर खाईये। इससे कीड़े मर जायेंग।
Cholesterol कम करने की दवा सहजन के फायदे ,नुकसान और उपयोग -FAQ –
सहजन के नुकसान क्या है?
क्योंकि मोरिंगा /सहजन में रेचक (lagjetiv)गुणधर्म भी होता है। जिसकी वजह से इसकी अधिक मात्रा में पत्तियों, छाल, जड़ों और मोरिंगा फल का प्रयोग करने से दस्त लग सकता है ।
क्या सहजन से यूरिक एसिड बढ़ता है?
सहजन के प्रयोग से यूरिक एसिड नियंत्रित रहता है।
सहजन की तासीर क्या होती है?
आयुर्वेद के अनुसार सहजन तासीर ठंडी होती है।
क्या सहजन किडनी के मरीजों के लिए अच्छा है?
सहजन का सेवन करने से पथरी का जोखिम कम होता है। क्योंकि सहजन के नियमित सेवन से यह किडनी में मिनरल्स को जमा होने से रोकता है जोकि पथरी का निर्माण करते हैं। क्योकि इसके प्रयोग से पेशाब का प्रवाह तेज रहता है।
संभावित नकारात्मक पहलू
हम सभी जानते हैं कि हर व्यक्ति के शरीर की प्रकृति अलग अलग होती है। इसीलिए शरीर की प्रकृति और उसकी क्षमता के अनुसार मोरिंगा/सहजन किसी -किसी को नुकसान भी दे देता है।
हालांकि अधिकतर लोगों के लिए यह सुरक्षित और स्वस्थ माना जाता है। फिरभी इसके कुछ मामूली नुकसानों पर भी ध्यान देना चाहिए।
क्योंकि मोरिंगा /सहजन में रेचक (lagjetiv)गुणधर्म भी होता है। जिसकी वजह से इसकी अधिक मात्रा में पत्तियों, छाल, जड़ों और मोरिंगा फल का प्रयोग करने से दस्त लग सकता है ।
गर्भवती महिलाओं के मामले में चिकत्सक की सलाह जरुरी है क्योकि इसकी निश्चित मात्रा से अधिक मात्रा लेने पर गर्भाशय संकुचन की समस्या बन सकती है ।
इसके अलावा अभी तक यह भी पूरी तरह से सिद्ध नहीं हो पाया है कि इसमें उपस्थित कोई भी विटामिन्स या मिनरल्स दूध के द्वारा बच्चे तक पहुंच सकता है या नहीं।
इसीलिए शिशुओं को स्तनपान कराने वाली महिलाओं को मोरिंगा/सहजन को किसी भी रूप में लेने से पहले चिकित्सक की सलाह जरुरी है।
आप जब भी इसका इस्तेमाल करना चाहते है तो या तो प्राकृतिक रूप से मिलने वाले पत्तियों ,फलों या छाल का प्रयोग करें या फिर किसी प्रतिष्ठित कम्पनी से लें ।
निष्कर्ष:
मोरिंगा/सहजन जड़ी -बूटी की श्रेणी में सम्पूर्ण आहार माना जाता है क्योकि इसकी पत्तियां शक्तिशाली पोषण देती हैं ।
इसमें मिलने वाले सभी पोषक तत्व अपने गुणों के साथ मिलकर इसे एक नया ‘सुपरफूड’ बनाते हैं। अपने इन गुणों के कारण ये हमारे आहार का नियमित हिस्सा बनने का पूर्ण हक़दार है ।
चेतावनी :
अंत में यही कहना है कि यहाँ पर जी गयी समस्त जानकारी ज्ञानर्जन और आयुर्वेद के प्रति जागरूक करने के लिए है। बिना डॉक्टर से परामर्श इसका सेवन करने से बचें । क्योकि हर औषधि की तरह इसकी भी मात्रा महत्व रखती है।

