नींद न आने की समस्या को दूर करने की दवा तगर के फायदे और नुकसान
नींद न आना (अनिद्रा) आजकल एक आम समस्या बन चुकी है। यह केवल थकान ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालती है। आयुर्वेद में एक ऐसी अद्भुत जड़ी-बूटी का ज़िक्र है जो इस समस्या के साथ-साथ कई और रोगों में भी लाभ देती है – तगर (Indian Valerian), जिसे सुगंधबाला भी कहते हैं।
तगर एक प्राचीन औषधि है, जिसके सुगंधित तेल और जड़ का उपयोग सदियों से नींद लाने, तनाव घटाने, दर्द कम करने और कई गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है।
तगर के बारे में संक्षेप में जानकारी
| गुण | विवरण |
|---|---|
| वानस्पतिक नाम | Valeriana jatamansi |
| परिवार | Valerianaceae |
| अंग्रेजी नाम | Indian Valerian |
| हिंदी नाम | तगर, सुगंधबाला, मुश्क बाला |
| संस्कृत नाम | तगर, कालानुसार्य, पिण्डतगर, कुटिल |
| तासीर | ठंडी |
| उपयोगी भाग | जड़, कंद |
| प्रमुख उपयोग | अनिद्रा, तनाव, मानसिक रोग, गठिया, मूत्र रोग, हृदय रोग, तंत्रिका विकार |
तगर के प्रमुख फायदे (Medicinal Benefits of Tager)
1. नींद न आने की समस्या में असरदार
- तगर का चूर्ण या काढ़ा नींद लाने में बेहद प्रभावी है।
- इसमें मौजूद प्राकृतिक सिडेटिव तत्व मस्तिष्क को शांत करके नींद की गुणवत्ता बढ़ाते हैं।
- सेवन विधि:
- चूर्ण – 1 से 3 ग्राम
- काढ़ा – 30 से 40 मिलीलीटर, रात को सोने से पहले
- तनाव, चिंता और बेचैनी में भी लाभकारी।
2. मानसिक रोगों में लाभकारी
- अवसाद, घबराहट, बाइपोलर डिसऑर्डर, स्किज़ोफ्रेनिया जैसे मानसिक रोगों में सहायक।
- 500 मि.ग्रा. तगर चूर्ण को शहद के साथ दिन में 3 बार लेना फायदेमंद।
- मानसिक संतुलन और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बेहतर करता है।
3. गले के रोग
- 1 ग्राम तगर चूर्ण + 65 मि.ग्रा. यशद भस्म = गले की खराश और सूजन में राहत।
4. आंखों की बीमारी
- तगर पत्तों का लेप आंखों के चारों ओर लगाने से दर्द में राहत।
- हरड़ के रस में पीसकर काजल की तरह लगाने से आंखों के रोग ठीक होते हैं।
5. मूत्र रोग
- 1-2 ग्राम तगर चूर्ण + चीनी, दिन में 2 बार लेने से पेशाब संबंधी समस्याएं कम होती हैं।
6. महिला स्वास्थ्य
- मासिक धर्म अनियमितता और ल्यूकोरिया में लाभकारी।
- नियमित सेवन से मासिक चक्र संतुलित होता है।
7. योनि दर्द
- तगर, बड़ी कटेरी, सेंधा नमक और देवदारु का काढ़ा + तिल का तेल, योनि दर्द और सूजन में लाभदायक।
8. डायबिटीज
- 1-3 ग्राम तगर चूर्ण या 30-40 मि.ली. काढ़ा रक्त शर्करा नियंत्रण में सहायक।
9. गठिया और जोड़ों का दर्द
- तगर चूर्ण + यशद भस्म का मिश्रण सूजन और दर्द में आराम देता है।
- तगर की जड़ की छाल + छाछ, गठिया में लाभकारी।
10. हिस्टीरिया और डिलीरियम
- तगर काढ़ा या शहद के साथ सेवन मानसिक अशांति में फायदेमंद।
- कई जड़ी-बूटियों के साथ काढ़ा बनाकर सेवन मानसिक शांति देता है।
11. तंत्रिका तंत्र विकार और लकवा
- तगर तेल से मालिश नसों को मज़बूती देता है।
- यशद भस्म के साथ तगर का सेवन लकवे में सहायक।
12. हृदय रोग
- तगर का काढ़ा हृदय को शक्ति और तंत्रिका तंत्र को मजबूती देता है।
13. भ्रम रोग
- 500 मि.ग्रा. तगर चूर्ण + शहद, दिन में 3 बार, भ्रम रोग के लक्षणों में सुधार करता है।
14. बेचैनी, घबराहट और पैरों की ऐंठन
- तगर चूर्ण का शहद के साथ सेवन तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।
- 150 मि.ग्रा. तगर चूर्ण पैरों की ऐंठन में फायदेमंद।
15. बेहोशी और मिर्गी
- तगर तेल + दालचीनी का काढ़ा, बेहोशी और मिर्गी में लाभकारी।
16. शरीर का कांपना (कम्पवात रोग)
- तगर + यशद भस्म का सेवन, शरीर के कांपने की समस्या में सहायक।
तगर का सेवन कैसे करें (Dosage & Usage)
| रूप | मात्रा |
|---|---|
| चूर्ण | 1-3 ग्राम |
| काढ़ा | 15-30 मिली |
| तेल (मालिश) | ज़रूरत अनुसार |
| सेवन का समय | भोजन के बाद या सोने से पहले |
नोट: सेवन से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूरी है।
तगर के नुकसान (Side Effects)
- पेट दर्द
- चक्कर आना
- सीने में जलन
- जी मिचलाना / उल्टी
- त्वचा पर खुजली या लाल चकत्ते
- गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के सेवन नहीं करना चाहिए।
FAQ – तगर के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. तगर की तासीर कैसी है?
तासीर ठंडी है, यह मन और शरीर को शांति देता है और तनाव कम करता है।
2. तगर नींद में कैसे मदद करता है?
इसमें प्राकृतिक सिडेटिव तत्व होते हैं जो दिमाग को रिलैक्स करके नींद लाने में मदद करते हैं।
3. क्या तगर का रोज़ाना सेवन सुरक्षित है?
हाँ, लेकिन 1-3 ग्राम से अधिक मात्रा और बिना चिकित्सक की सलाह के सेवन हानिकारक हो सकता है।
4. तगर किन बीमारियों में लाभकारी है?
अनिद्रा, तनाव, मानसिक रोग, गठिया, मूत्र रोग, हृदय रोग, तंत्रिका विकार, डायबिटीज आदि में।
5. तगर के अन्य नाम क्या हैं?
सुगंधबाला, मुश्क बाला, Indian Valerian, Valeriana jatamansi।

