लोहासव सिरप (Lohasav Syrup) के फायदे, नुकसान और सेवन विधि
लोहासव – Lohasav Syrup इसके नाम में ही इसके गुण समाए हुए हैं।
“लोह” यानी लौह तत्व (आयरन), जो शरीर को शक्ति और ऊर्जा प्रदान करता है,
और “आसव” – जिसका अर्थ होता है ऐसी आयुर्वेदिक दवा, जो कई औषधीय जड़ी-बूटियों को मिलाकर उबालने और फिर 3 से 6 महीने तक धूप में रखकर प्राकृतिक रूप से फर्मेंटेशन करके बनाई जाती है।
लोहासव सिरप (Lohasav Syrup) क्या है?
इस विशेष विधि से तैयार होने वाला यह आसव 5% से 10% तक प्राकृतिक अल्कोहल युक्त होता है, जो नशा नहीं करता बल्कि शरीर के लिए औषधीय लाभ पहुंचाता है। इसे आप आयुर्वेदिक “हर्बल टॉनिक” भी कह सकते हैं, जो शरीर को संपूर्ण रूप से स्वस्थ रखने में मदद करता है।
इसका उल्लेख प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ “भैषज्य रत्नावली” में भी मिलता है, जो इसकी प्रमाणिकता को दर्शाता है।
लोहासव — जैसा नाम वैसा ही इसका असर। “लौह” यानी आयरन, जो शरीर को ताकत और ऊर्जा प्रदान करता है, और “आसव” का मतलब होता है जड़ी-बूटियों का ऐसा मिश्रण जिसे उबालने के बाद 3 से 6 महीने तक धूप में रखकर प्राकृतिक रूप से किण्वित (फर्मेंट) किया जाता है। इस प्रक्रिया से जो औषधीय रस बनता है, उसमें स्वाभाविक रूप से 5% से 10% तक अल्कोहल होता है। यह अल्कोहल नशा नहीं करता बल्कि दवा के रूप में काम करता है।
लोहासव कैसे कार्य करता है?
लोहासव (Lohasav Syrup) को आयरन युक्त भस्म और शक्तिशाली जड़ी-बूटियों के संयोजन से तैयार किया जाता है। यह शरीर में आयरन की पूर्ति कर हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाता है। इसका मुख्य उपयोग एनीमिया, शारीरिक कमजोरी, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, लीवर की समस्याएं, बवासीर आदि में किया जाता है।
यह एक प्रभावशाली हेमेटिनिक (रक्तवर्धक) दवा है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या को बढ़ाने में मदद करती है।
यह विशेष आयुर्वेदिक दवा “भैषज्य रत्नावली” जैसे प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है।
लोहासव (Lohasav Syrup) एक प्रकार की औषधीय “हर्बल वाइन” है, जो शरीर में आयरन की कमी को दूर करके संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ पहुंचाती है। यह दवा आयरन युक्त लौह भस्म और कई अन्य औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार की जाती है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर खून की कमी को दूर करती है।
लोहासव के मुख्य घटक
- मुख्य घटक: लौह भस्म
- अन्य घटक: आंवला, हरड़, बहेड़ा, करौंदा, विदंग, पीपली, काली मिर्च, सोंठ, धातकी के फूल, चित्रक, नागरमोथा, अदरक, अजवाइन, शहद, गुड़, पानी।
लोहासव के गुण
लोहासव (Lohasav Syrup) में मौजूद प्राकृतिक तत्व इसे एक बहुउपयोगी आयुर्वेदिक टॉनिक बनाते हैं। इसके प्रमुख गुण इस प्रकार हैं:
- शरीर में आयरन की कमी को दूर करता है।
- खून की कमी, थकान और चक्कर जैसी समस्याओं को दूर करता है।
- पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है।
- भूख न लगने की समस्या को ठीक करता है।
- ब्लड सर्कुलेशन को सुधारता है।
- अस्थमा और सांस की दिक्कत में सहायक हो सकता है।
- हृदय की धड़कन को संतुलित करता है।
लोहासव किन-किन रोगों में उपयोगी है?
- एनीमिया (खून की कमी)
- बवासीर (Piles)
- कब्ज (Constipation)
- पाचन विकार (Digestive Disorders)
- लीवर व आंतों की समस्या
- मोटापा
- भूख की कमी
- तिल्ली (स्प्लीन) का बढ़ना
- खांसी
- सांस फूलना
- शारीरिक कमजोरी
- जीभ का स्वाद खराब होना
लोहासव सिरप के प्रमुख फायदे
1. एनीमिया में लाभकारी
लोहासव (Lohasav Syrup) में मौजूद लौह भस्म से आयरन की भरपूर मात्रा मिलती है, जो शरीर में रेड ब्लड सेल्स को बढ़ाकर हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करती है।
गर्भवती महिलाओं में होने वाली आयरन की कमी को भी यह प्रभावी रूप से पूरा करता है।
2. कब्ज की समस्या में राहत
लोहासव (Lohasav Syrup) में त्रिफला (आंवला, हरड़, बहेड़ा) जैसे घटक शामिल हैं, जो कब्ज में प्राकृतिक रूप से राहत देते हैं।
सेवन विधि: 15–25 ml लोहासव को गुनगुने पानी के साथ मिलाकर, दिन में दो बार भोजन के 30 मिनट बाद लें।
रात में एक बार भी लिया जा सकता है।
3. बवासीर में असरदार
बवासीर की समस्या कब्ज के कारण होती है। लोहासव कब्ज को जड़ से ठीक कर देता है, जिससे बवासीर में राहत मिलती है।
अगर दर्द अधिक हो, तो पहले वैद्य की सलाह से अन्य दर्द निवारक आयुर्वेदिक दवाएं लें, फिर लोहासव शुरू करें।
4. पाचन तंत्र को मजबूत करता है
कब्ज से राहत देने के साथ-साथ यह पाचन क्रिया को सुचारू बनाता है। भूख लगने में सहायता करता है और भोजन का सही पाचन करता है।
5. लीवर की सूजन में लाभकारी
लोहासव आंतों की सफाई कर लीवर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने में सहायक है।
यह लीवर की सूजन को कम करके पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है।
6. भूख बढ़ाने में सहायक
इसके क्षुधावर्धक गुण भूख की कमी को दूर करते हैं। त्रिफला जैसे घटक इसे असरदार बनाते हैं।
7. ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है
इसमें मौजूद अजवाइन, करौंदा, सोंठ जैसे तत्व खून को पतला करने में मदद करते हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं।
8. स्वाद ग्रंथि को सुधारता है
एनीमिया की वजह से जीभ का स्वाद बिगड़ जाता है। लोहासव का नियमित सेवन स्वाद को दोबारा वापस लाने में मदद करता है।
9. मोटापा कम करने में सहायक
लोहासव में मौजूद अजवाइन शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में सहायक है। यह मोटापे को नियंत्रित करने में मदद करता है।
10. सांस फूलने की समस्या में राहत
आयरन की कमी के कारण सांस फूलने जैसी समस्या होती है। लोहासव खून की कमी को दूर करके शरीर की ऊर्जा बढ़ाता है।
11. तिल्ली (स्प्लीन) बढ़ने की समस्या में लाभकारी
लीवर की सूजन के कारण तिल्ली का आकार बढ़ जाता है। लोहासव लीवर को स्वस्थ बनाकर तिल्ली को भी ठीक करता है।
12. शारीरिक कमजोरी में उपयोगी
लोहासव में मौजूद प्राकृतिक आयरन शरीर की कमजोरी को दूर कर नई ऊर्जा प्रदान करता है।
लोहासव की खुराक, मात्रा और सेवन विधि
- मात्रा: 15–25 ml
- अधिकतम मात्रा: 25 ml
- सेवन की बारंबारता: दिन में 2 बार
- समय: भोजन के 30 मिनट बाद
- सेवन विधि: बराबर मात्रा में गुनगुने पानी के साथ
- सेवन अवधि: वैद्य के निर्देशानुसार
लोहासव के नुकसान (Side Effects)
- बिना आवश्यकता या सलाह के सेवन करने पर गर्भधारण प्रभावित हो सकता है।
- अधिक मात्रा में लेने से कब्ज, पेट दर्द, सिर दर्द, उल्टी, दस्त या चक्कर आ सकते हैं।
- मधुमेह रोगियों को नुकसान हो सकता है क्योंकि इसमें गुड़ होता है।
- गलत खुराक से मतली या उल्टी जैसी परेशानी हो सकती है।
लोहासव से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQ)
Q. लोहासव में कितना अल्कोहल होता है?
A. इसमें 5% से 10% तक प्राकृतिक अल्कोहल होता है, जो नशा नहीं करता बल्कि औषधीय कार्य करता है।
Q. हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए सबसे अच्छा आयुर्वेदिक सिरप कौन सा है?
A. लोहासव, क्योंकि इसमें लौह भस्म से प्राकृतिक आयरन की भरपूर मात्रा होती है।
Q. लोहासव किन रोगों में फायदेमंद है?
A. बवासीर, कब्ज, पाचन समस्या, लीवर रोग, एनीमिया, मोटापा, सांस फूलना, तिल्ली वृद्धि, खांसी और कमजोरी।
Q. क्या गर्भावस्था में लोहासव लेना चाहिए?
A. हां, लेकिन केवल वैद्य या डॉक्टर की सलाह से ही।
Q. लोहासव के दुष्प्रभाव क्या हैं?
A. गलत खुराक या बिना जरूरत के सेवन करने पर – सिर दर्द, दस्त, उल्टी, चक्कर, पेट दर्द, और गर्भ पर असर हो सकता है।
⚠️ चेतावनी:
यह लेख केवल शैक्षिक जानकारी और आयुर्वेद के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से है। कृपया किसी भी औषधि का उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदाचार्य या डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

